4.8.17

कड़वा फल - प्रेरक कहानी

नमस्कार, मैं Vijender Godara आज आपके लिए एक रोचक शिक्षाप्रद कहानी लेकर इस वेबसाइट पर हाजिर हूं ।
उम्मीद है इस कहानी से आपको जरूर कुछ सीखने को मिलेगा...

कहानी - कड़वा फल



एक फकीर बहुत दिनों तक एक बादशाह के साथ रहा । बादशाह और फकीर का प्रेम इतना बढ़ गया कि बादशाह रात को भी उसे अपने कमरे में सुलाता । कोई भी काम होता, दोनों साथ - साथ ही करते । एक दिन दोनों शिकार खेलने गए । भूखे - प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुँचे । पेड़ पर एक फल लगा था । बादशाह ने घोड़े पर चढ़कर फल को अपने हाथ से तोडा । बादशाह ने फल के छह टुकड़े किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा फकीर को दिया । फकीर ने फल को खाया और बोला - "बहुत स्वादिष्ट ! ऐसा फल कभी नहीँ खाया । एक टुकड़ा और दे दें ।" दूसरा टुकड़ा भी फकीर को मिल गया । फकीर ने फिर एक टुकड़ा और बादशाह से मांग लिया । इसी तरह फकीर ने पांच टुकड़े मांग कर खा लिए । जब फकीर ने आखिरी टुकड़ा माँगा तो बादशाह ने कहा - "यह सीमा से बाहर है । आखिर मैं भी तो भूखा हूं । मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीँ करते ।" और बादशाह ने फल का टुकड़ा मुँह में रख लिया । मुँह में रखते ही राजा ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह कड़वा था । बादशाह बोला - "तुम पागल तो नहीँ । इतना कड़वा फल कैसे खा गए ?" फकीर का उत्तर था - "जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक कड़वे फल की शिकायत कैसे करूँ । सब टुकड़े इसलिए लेता गया, ताकि आपको पता न चले कि फल कड़वा है ।"
यह सुनकर बादशाह ने फकीर को गले लगा लिया ।

शिक्षा :- इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हमें ईश्वर द्वारा दी किसी भी वस्तु में कोई कमी नहीँ निकालनी चाहिए ।

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