भारत के अद्भुत अनसुलझे रहस्य (Bharat Ke Adbhut Rahasya)

विविधताओं का देश अखण्ड भारत जहां इतने रहस्य छुपे है कि आज तक उनको कोई नहीं सुलझा पाया है । भारत में आज भी कई ऐसे अनसुलझे रहस्य हैं, जिनका जवाब विज्ञान के पास भी नहीं हैं । भले ही इन प्राचीन रहस्यों के बारे में सभी के अपने विचार हों, लेकिन सही जवाब किसी के भी पास नहीं हैं ।
आज हम इस पोस्ट में भारत के ऐसे ही अद्भुत रहस्यों की बात करेंगे जो नहीं सुलझ पाएं है ।
Bharat Ke Ansuljhe Rahasya

भारत के अनसुलझे रहस्य, अद्भुत रहस्य

Unsolved Mystery of India in Hindi


🗿 उत्तरप्रदेश का रंगमहल मन्दिर का रहस्य
Rangmahal Mandir Ka Rahasya

» उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में स्थित यह मंदिर आज भी अपने में कई रहस्य समेटे हुए हैं। माना जाता है कि आज भी निधिवन में रास रचाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रंग महल में विश्राम करते हैं। मंदिर में प्रतिदिन अँधेरा होने से पहले माखन मिश्री का प्रसाद रखा जाता है और सोने का एक पलंग लगाया जाता है। रात होते ही मंदिर के दरवाजे अपने आप बंद हो जाते हैं और सुबह बिस्तर देखने पर ऐसा लगता है जैसे कोई रात में यहाँ सोया हो, साथ ही उसने रखे गए प्रसाद को भी ग्रहण किया हो। मान्यता है कि रात में मंदिर में रुकने वाले किसी भी प्राणी की मृत्यु हो जाती है। यह मंदिर आज भी लोगों के बीच एक रहस्य बना हुआ है कि यह सब कैसे हो जाता है।

ये भी देखें • दुनिया के अनसुलझे रहस्य 

🗿 महाभारत के अश्वत्थामा का रहस्य
Ashvatthama Ka Rahasya

» कहा जाता है कि अश्वत्थामा का वजूद आज भी है। दरअसल, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने निकले अश्वत्थामा को उनकी एक चूक भारी पड़ी और भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें युगों-युगों तक भटकने का श्राप दे दिया। ऐसा कहा जाता है कि पिछले लगभग 5 हजार वर्षों से अश्वत्थामा भटक रहे हैं।
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर से 20 किमी दूर असीरगढ़ का किला है। कहा जाता है कि इस किले में स्थित शिव मंदिर में अश्वत्थामा आज भी पूजा करने आते हैं। स्थानीय निवासी अश्वत्थामा से जुड़ी कई कहानियां सुनाते हैं। वे बताते हैं कि अश्वत्थामा को जिसने भी देखा, उसकी मानसिक स्थिति हमेशा के लिए खराब हो गई। इसके अलावा कहा जाता है कि अश्वत्थामा पूजा से पहले किले में स्थित तालाब में नहाते भी हैं।
बुरहानपुर के अलावा मप्र के ही जबलपुर शहर के गौरीघाट (नर्मदा नदी) के किनारे भी अश्वत्थामा के भटकने का उल्लेख मिलता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कभी-कभी वे अपने मस्तक के घाव से बहते खून को रोकने के लिए हल्दी और तेल की मांग भी करते हैं। इस संबंध में हालांकि स्पष्ट और प्रामाणिक आज तक कुछ भी नहीं मिला है।

गजब के रोचक तथ्य (भाग - 6)

🗿 सोन भंडार गुफा का रहस्य
सोन गुफा का रहस्य

» बिहार के राजगीर में छुपा है मौर्य शासक बिम्बिसार का अमूल्य स्वर्ण भंडार। बिहार का एक छोटा-सा शहर राजगीर, जो कि नालंदा जिले में स्‍थित है, कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जाता है। यह शहर प्राचीन समय में मगध की राजधानी था। यहीं पर भगवान बुद्ध ने मगध के सम्राट बिम्बिसार को धर्मोपदेश दिया था। यह शहर बुद्ध से जुड़े स्मारकों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
इसी राजगीर में है सोन भंडार गुफा। इस गुफा के बारे में कहा जाता है कि इसमें बेशकीमती खजाना छुपा है जिसे कि आज तक कोई नहीं खोज पाया है। यह खजाना मौर्य शासक बिम्बिसार का बताया जाता है, हालांकि कुछ लोग इसे पूर्व मगध सम्राट जरासंध का भी बताते हैं।

🗿 लेह-लद्दाख का मैग्नेटिक हिल
Magnetic Hill Ka Rahasya

 »लेह-लद्दाख के क्षेत्र में स्थित इस जगह को 'ग्रैविटी हिल' भी कहा जाता है। लेह-कारगिल, श्रीनगर नेशनल हाईवे पर स्थित यह जगह लेह से 50 किमी दूर है और समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मैग्नेटिक हिल लेह आने वाले पर्यटकों के बीच काफी मशहूर है। इस पहाड़ी की खासियत है कि यहां से गुजरने वाली हर कार खुद-ब-खुद रास्ते पर जमी रहती है। सामान्य भाषा में कहें, तो आमतौर पर पहाड़ी रास्तों में हम गाड़ी गियर में खड़ी करते है, लेकिन यहां अगर आप अपनी गाड़ी न्यूट्रल में भी खड़ा कर दें, तो भी गाड़ी घाटी से नीचे नहीं फिसलेगी।

हालांकि यह लोगों का भ्रम है कि पहाड़ी के ऊपर गाड़ियां घूमने लगती हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसके पीछे जो कारण छिपा है, उसके मुताबिक, यह विशुद्ध रूप से 'ऑप्टिकल इफेक्ट' के चलते होता है, जो पहाड़ी की वास्तविक और विशिष्ट बनावट के चलते उत्पन्न होता है।

हौसला, उत्साह बढ़ाने वाली प्रेरक शायरी

🗿 तिब्बत के यमद्वार का रहस्य
Yamdwar Ka Rahasya

» प्राचीन काल में तिब्बत को 'त्रिविष्टप' कहते थे। यह अखंड भारत का ही हिस्सा हुआ करता था। तिब्बत को चीन ने अपने कब्जे में ले रखा है। तिब्बत में दारचेन से 30 मिनट की दूरी पर है यह 'यम का द्वार' ।
यम का द्वार पवित्र कैलाश पर्वत के रास्ते में पड़ता है। हिंदू मान्यता अनुसार, इसे मृत्यु के देवता यमराज के घर का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह कैलाश पर्वत की परिक्रमा यात्रा के शुरुआती प्वाइंट पर है। तिब्बती लोग इसे 'चोरटेन कांग नग्यी' के नाम से जानते हैं, जिसका मतलब होता है दो पैर वाले स्तूप ऐसा कहा जाता है कि यहां रात में रुकने वाला जीवित नहीं रह पाता। ऐसी कई घटनाएं हो भी चुकी हैं, लेकिन इसके पीछे के कारणों का खुलासा आज तक नहीं हो पाया है। साथ ही यह मंदिरनुमा द्वार किसने और कब बनाया, इसका कोई प्रमाण नहीं है। ढेरों शोध हुए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।

भारत के अद्भुत अनसुलझे रहस्य पढ़कर आपको कैसा लगा । अगर आपके पास भी है ऐसे ही अद्भुत रहस्य, अनसुलझे रहस्य तो उन्हें इस साइट के माध्यम से दुनिया के साथ शेयर करें ।
हिंदी को आगे बढ़ाएं...
हमारा Facebook Page लाईक करें, Twitter और Instagram पर हमें Follow करें ।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ